श्री राम भगवान की आरती श्री रामचंद्र कृपालु भज मन – सम्पूर्ण पाठ, अर्थ एवं लाभ

श्री राम भगवान की आरती “श्री रामचंद्र कृपालु भज मन” अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय स्तुति है। यह आरती विशेष रूप से राम नवमी, मंगलवार और दैनिक संध्या आरती में गाई जाती है। श्री राम की आरती करने से जीवन में शांति, धर्म और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्री राम आरती का सम्पूर्ण पाठ

श्री रामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणम्। नवकंज लोचन, कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥ कंदर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरद सुंदरम्। पटपीत मानहु तड़ित रुचि, शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥ भज दीनबंधु दिनेश, दानव दैत्य वंश निकंदनम्। रघुनंद आनंद कंद, कोसलचंद दशरथ नंदनम्॥ सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु, उदार अंग विभूषणम्। आजानुभुज शर चाप धर, संग्राम जित खरदूषणम्॥ इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्॥ ॥ श्री रामचंद्र जी की आरती ॥ जय सियाराम जय जय सियाराम। जय सियाराम जय जय सियाराम॥

श्री राम आरती का अर्थ

इस आरती में भगवान श्री राम के करुणामय स्वरूप, मर्यादा, धर्म और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का वर्णन है। यह आरती भक्त को सदाचार, धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

श्री राम आरती के लाभ

  • मन में शांति और स्थिरता
  • परिवार में सुख और सद्भाव
  • धार्मिक और नैतिक बल में वृद्धि
  • नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
  • जीवन में मर्यादा और संतुलन

श्री राम आरती कब करें?

✔ प्रतिदिन सुबह और शाम
✔ राम नवमी के दिन विशेष रूप से
✔ मंगलवार को
✔ किसी भी शुभ कार्य से पूर्व

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री राम आरती कब करनी चाहिए?

प्रतिदिन संध्या समय तथा विशेष रूप से राम नवमी के दिन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

राम नवमी पर कौन सी आरती गानी चाहिए?

राम नवमी के दिन “श्री रामचंद्र कृपालु भज मन” आरती गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

श्री राम आरती से क्या लाभ होता है?

नियमित आरती से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और धार्मिक शक्ति में वृद्धि होती है।