पूर्णिमा–अमावस्या तिथियाँ 2026

2026 की सभी पूर्णिमा–अमावस्या तिथियाँ: महत्व, पूजा-विधि, व्रत-नियम और लाभ
धार्मिक कैलेंडर 2026 • अद्यतन: 20 फरवरी 2026

2026 की सभी पूर्णिमा–अमावस्या तिथियाँ महत्व, पूजा-विधि, व्रत-नियम और लाभ

पूरे वर्ष 2026 की पूर्णिमा तथा अमावस्या तिथियाँ—महत्व, व्यापक पूजा-विधि, व्रत-नियम, करने-न-करने योग्य कार्य, “अधिक मास” का महत्व और परिवार/स्वास्थ्य पर प्रभाव—सब कुछ एक ही स्थान पर।

नोट: तिथियाँ चंद्र-पंचांग पर आधारित हैं। क्षेत्र/स्थानीय पंचांग के अनुसार 1 दिन का अंतर संभव है।

पूर्णिमा क्या है?

पूर्णिमा वह चंद्र तिथि है जब चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण दिखाई देता है। इस दिन चंद्र ऊर्जा उच्चतम होती है—मन शांत, स्थिर और सात्त्विक बनता है; ध्यान-जप-संकल्प सिद्धि तेज़ होती है। सत्यनारायण व्रत, दान-स्नान, और अनेक प्रमुख पर्व (बुद्ध पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, रक्षाबंधन, शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा) परंपरागत रूप से इसी तिथि पर मनाए जाते हैं।

  • आध्यात्मिक लाभ: मन-शुद्धि, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मकता और रचनात्मकता में वृद्धि।
  • धार्मिक महत्व: सत्यनारायण कथा, दीपदान, दान-पुण्य का अनंत फल।

अमावस्या क्या है?

अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा आकाश में अदृश्य होता है। इसे पितृ-कृत्य (तर्पण/श्राद्ध), नकारात्मकता शमन, गहन साधना और आत्मावलोकन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। दीपावली (कार्तिक अमावस्या), हरियाली अमावस्या और महालया अमावस्या जैसे पर्व भी इसी तिथि पर पड़ते हैं।

  • आध्यात्मिक लाभ: अवचेतन मन की शुद्धि, पुराने कर्म-बंधनों का क्षय, नई आदतों की स्थापना।
  • धार्मिक महत्व: पितृ-तर्पण, दीपदान, हवन और ग्रह-दोष शांति।

2026 की पूर्णिमा–अमावस्या तिथियाँ (टेबल)

माह पूर्णिमा (तिथि/नाम) अमावस्या (तिथि/नाम)
जनवरी3 जनवरी – पौष पूर्णिमा18 जनवरी – माघ/मौनी अमावस्या
फ़रवरी1 फ़रवरी – माघ पूर्णिमा17 फ़रवरी – फाल्गुन अमावस्या
मार्च3 मार्च – फाल्गुन पूर्णिमा18–19 मार्च – चैत्र अमावस्या
अप्रैल1–2 अप्रैल – चैत्र पूर्णिमा17 अप्रैल – वैशाख अमावस्या
मई1 मई – वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा)16 मई – ज्येष्ठ अमावस्या
मई (अधिक)30–31 मई – अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा
जून29–30 जून – ज्येष्ठ पूर्णिमा14–15 जून – अधिक ज्येष्ठ अमावस्या
जुलाई29 जुलाई – आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा)14 जुलाई – आषाढ़ अमावस्या
अगस्त27–28 अगस्त – श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन)12 अगस्त – श्रावण (हरियाली) अमावस्या
सितंबर25–26 सितंबर – भाद्रपद पूर्णिमा10–11 सितंबर – भाद्रपद/महालया अमावस्या
अक्टूबर23–24 अक्टूबर – आश्विन/शरद पूर्णिमा10 अक्टूबर – आश्विन अमावस्या
नवंबर24 नवंबर – कार्तिक पूर्णिमा8–9 नवंबर – कार्तिक अमावस्या (दीपावली)
दिसंबर23–24 दिसंबर – मार्गशीर्ष पूर्णिमा8–9 दिसंबर – मार्गशीर्ष अमावस्या

नोट: आपके शहर/देशांतर-अक्षांश के अनुसार sunrise/sunset और तिथि-आरंभ/समाप्ति में थोड़ा अंतर हो सकता है। व्रत-पूजन से पहले अपने स्थानीय पंचांग/मंदिर परामर्श अवश्य लें।


पूर्णिमा पर पूजा-विधि व क्या करें/न करें

सुबह की तैयारी

  • स्नान कर स्वच्छ/सात्त्विक वस्त्र धारण करें; घर में धूप-दीप से शुद्धिकरण करें।
  • चंद्र मंत्र “ॐ सोम सोमाय नमः” का जप करें (संख्या अपनी साधना अनुसार रखें)।
  • गंगा/नदी स्नान संभव न हो तो नमक-मिश्रित जल से स्नान कर मानसिक शुद्धि-संकल्प लें.

सत्यनारायण व्रत/पूजन (गृहस्थों के लिए)

  • पीठ पर पीला वस्त्र, पाट पर कलश, नारियल, तुलसी-दल, चावल, पंचामृत की व्यवस्था करें।
  • कथा-पूजन, नैवेद्य, आरती; संध्या में दीपदान और चंद्र-अर्घ्य (कच्चे दूध/जल से)।

क्या करें?

  • ध्यान-जप-पाठ, सकारात्मक संकल्प, परोपकार/दान—चावल, दाल, गुड़, दूध, वस्त्र।

क्या न करें?

  • क्रोध, कटु वाणी, तामसिक आहार (मांस/मद्य), झूठ/अनैतिक कार्य।

अमावस्या पर पूजा-विधि व क्या करें/न करें

पितृ-कृत्य

  • कुश, तिल, जल से तर्पण विधि; पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता—भोजन/अन्नदान।

ऊर्जा-शुद्धि अनुष्ठान

  • दीपदान—विशेषकर दक्षिण दिशा में; गुग्गुल/कपूर/लौंग धूप से घर का शुद्धिकरण।

साधना/आत्मावलोकन

  • मौन/ध्यान, जर्नलिंग—पुरानी आदतें पहचानना, नई का संकल्प लेना।

क्या करें?

  • उपवास/फलाहार, पितरों के नाम से दान, वृक्षारोपण (विशेषतः श्रावण अमावस्या)।

क्या न करें?

  • नई परियोजना/निवेश आरंभ, अनावश्यक यात्राएँ, अतिभोग/क्रोध/अपशब्द।

अधिक मास 2026 का महत्व

2026 में मध्य मई से मध्य जून के बीच अधिक (पुरुषोत्तम) मास पड़ रहा है। यह चंद्र-सौर समंजन हेतु आता है और साधना-दान-जप-तप का महाफल प्रदान करने वाला माना जाता है। इस काल में विवाह/गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य सामान्यतः टाले जाते हैं; विष्णु-उपासना, दान, आत्म-चिंतन, संकल्प-शुद्धि पर बल दिया जाता है।


मनोवैज्ञानिक/ऊर्जा प्रभाव

पूर्णिमा: रचनात्मकता, प्रेम, उदारता, सामाजिकता में वृद्धि—भावनाएँ उफान पर, इसलिए निर्णय शांत मन से लें।
अमावस्या: अवचेतन की परतें सक्रिय—पुराने पैटर्न छोड़ने, नई आदत/संकल्प अपनाने का श्रेष्ठ समय।

घर-परिवार पर प्रभाव

  • पूर्णिमा: सौहार्द, लक्ष्मी-कृपा, शिशुओं/वृद्धों के लिए शांति-दायी वातावरण।
  • अमावस्या: धूप-दीप/सफाई से नकारात्मकता दूर—शांति व स्थिरता का अनुभव।

प्रश्नोत्तर (FAQs)

1) 2026 में कुल कितनी पूर्णिमा हैं?

अधिक मास के कारण कई पंचांग 2026 में 12 के स्थान पर 13 पूर्णिमा दिखाते हैं। पालन के लिए अपना स्थानीय पंचांग देखें।

2) 2026 में कार्तिक अमावस्या (दीपावली) कब है?

8–9 नवंबर 2026 को कार्तिक अमावस्या पड़ रही है (तिथि आरंभ/समाप्ति के अनुसार पालन में क्षेत्रीय अन्तर हो सकता है)।

3) गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?

29 जुलाई 2026—व्यास पूजन/गुरु-वंदना का पावन दिन।

4) अधिक मास 2026 कब है?

मध्य मई से मध्य जून 2026 के बीच—इसी कारण “अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा/अमावस्या” भी दिखाई देती है।

5) व्रत किस दिन रखें—पहले या अगले?

आम नियम: जिस दिन सूर्योदय/मध्याह्न में तिथि रहती है, प्रायः उसी दिन व्रत। परंतु अंतिम निर्णय अपने स्थानीय पंचांग/मंदिर परंपरा से लें।


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